क्षेत्र भर में फल फूल रही हैं गांजे,चरस की फ़सल युवा पीढ़ी बढ़ रही हैं नशे की ओर,समाज में फैली चिंता

क्षेत्र भर में फल फूल रही हैं गांजे,चरस की फ़सल युवा पीढ़ी बढ़ रही हैं नशे की ओर,समाज में फैली चिंता
क्षेत्र भर में फल फूल रही हैं गांजे,चरस की फ़सल
युवा पीढ़ी बढ़ रही हैं नशे की ओर,समाज में फैली चिंता
पटियाली नगर व ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के किनारे दोनों ओर इन दिनों गांजे की फ़सल खूब लहलहाती हुई युवा नशेड़ियों का मन मोहित कर उन्हें अपनी ओर खींच रही हैं बेरोजगार नशेड़ियों के लिये यह मुफ़्त का नशा हैं कुछ युवा नशेड़ियों ने इस को अपना बिजनेस भी बना लिया हैं युवा गांजे के पत्ते तोड़ते हुये देख जा सकते ऐसा नही हैं कि इस नशे के आदी युवा ही हैं इस में बच्चे और बूढ़े भी शामिल हैं नशे का सेवन करने वाले लोग गांजे के पत्तों को हथेलियों में सरसों का तेल लगा कर खूब मसलकर इस में से चरस व बालूचर निकालते हैं जिसको नशेबाज सुल्फा भी कहते हैं नशा करने बाले इसका सेवन चिलम,सिगरेट आदि तरहों से करते हैं मंहगे दामों में बिकने बाला गांजा,चरस भारी मात्रा में पैदा हो रहा हैं और नशेड़ियों को मुफ़्त में मिल रहा हैं कुछ नशेड़ियों ने बताया कि गांजे के पेड़ से निकाली गई चरस की बाजारू क़ीमत एक लाख रुपये किलो के आसपास होती हैं कुछ नशेड़ियों ने इसको अपना धंधा भी बना लिया हैं वह गांजे के पेड़ से निकाली गई चरस को इखट्टा कर लेते हैं और दूसरी जगह जाकर नशेड़ियों को बेच देते हैं युवा पीढ़ी नशे की ओर बढ़ रही हैं यह देखकर समाज के लोग चिंतित हैं
नगर के लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की हैं कि इस गांजे की फ़सल पर कीटनाशक दवा का छिड़काव कराकर या अन्य उपायों से गांजे की फ़सल को नष्ट कराया जाये
पटियाली नगर व ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के किनारे दोनों ओर इन दिनों गांजे की फ़सल खूब लहलहाती हुई युवा नशेड़ियों का मन मोहित कर उन्हें अपनी ओर खींच रही हैं बेरोजगार नशेड़ियों के लिये यह मुफ़्त का नशा हैं कुछ युवा नशेड़ियों ने इस को अपना बिजनेस भी बना लिया हैं युवा गांजे के पत्ते तोड़ते हुये देख जा सकते ऐसा नही हैं कि इस नशे के आदी युवा ही हैं इस में बच्चे और बूढ़े भी शामिल हैं नशे का सेवन करने वाले लोग गांजे के पत्तों को हथेलियों में सरसों का तेल लगा कर खूब मसलकर इस में से चरस व बालूचर निकालते हैं जिसको नशेबाज सुल्फा भी कहते हैं नशा करने बाले इसका सेवन चिलम,सिगरेट आदि तरहों से करते हैं मंहगे दामों में बिकने बाला गांजा,चरस भारी मात्रा में पैदा हो रहा हैं और नशेड़ियों को मुफ़्त में मिल रहा हैं कुछ नशेड़ियों ने बताया कि गांजे के पेड़ से निकाली गई चरस की बाजारू क़ीमत एक लाख रुपये किलो के आसपास होती हैं कुछ नशेड़ियों ने इसको अपना धंधा भी बना लिया हैं वह गांजे के पेड़ से निकाली गई चरस को इखट्टा कर लेते हैं और दूसरी जगह जाकर नशेड़ियों को बेच देते हैं युवा पीढ़ी नशे की ओर बढ़ रही हैं यह देखकर समाज के लोग चिंतित हैं
नगर के लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की हैं कि इस गांजे की फ़सल पर कीटनाशक दवा का छिड़काव कराकर या अन्य उपायों से गांजे की फ़सल को नष्ट कराया जाये